जांच आख्या के बाद भी कार्रवाई नहीं, मिडडे मील घोटाले पर उठे सवाल


 कंपोजिट विद्यालय बल्दी राय का मामला*

*सुलतानपुर*

शिक्षा क्षेत्र बल्दीराय अंतर्गत कस्बे के कंपोजिट विद्यालय में मिडडे मील में अनियमितता और धांधली का मामला सामने आने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होने से जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद भी दोषियों पर कार्रवाई न होना आमजन में नाराजगी और अविश्वास का कारण बन रहा है।

*क्या था मामला*

बल्दीराय कस्बे के कंपोजिट विद्यालय में मध्यान्ह भोजन योजना के तहत छात्रों की वास्तविक उपस्थिति कम होने के बावजूद रजिस्टर में अधिक संख्या दर्शाकर सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगा था। इस संबंध में स्थानीय ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई थी।

*24 फरवरी को खन्ड शिक्षा अधिकारी ने की थी जांच*

शिकायत के आधार पर खंड शिक्षा अधिकारी बल्दीराय को जांच सौंपी गई। 24 फरवरी को विद्यालय पहुंचकर की गई जांच में कई अनियमितताएं सामने आईं। जांच के दौरान यह पाया गया कि जिम्मेदार अध्यापक ने उपस्थिति रजिस्टर में छात्रों की संख्या वाले कॉलम को खाली छोड़ा था, जिससे बाद में अधिक संख्या दर्ज कर बिल-वाउचर के माध्यम से सरकारी धन निकाला जा सके।

जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से संबंधित अध्यापकों को दोषी ठहराते हुए यह भी उल्लेख किया कि उपस्थिति कॉलम खाली छोड़ना गंभीर अनियमितता है और इससे फर्जी संख्या बढ़ाने की संभावना की पुष्टि होती है।

*छात्रो के फोटो को लेकर भी उठे सवाल*

जांच के दौरान 119 छात्रों की उपस्थिति दर्शाई गई और उनके फोटो भी लिए गए। ग्रामीणों का आरोप है कि यह नियम नहीं है कि ये फोटो जांच के समय ही लिए जाय या तो नियमित रूप से पहले भी लिए जाते रहे हैं। यदि पहले से फोटो उपलब्ध थे तो उन्हें जांच में प्रस्तुत क्यों नहीं किया गया।

*पहले भी एक अध्यापक पर हो चुकी है कार्रवाई*

बताया जा रहा है कि इसी विद्यालय में पूर्व में मिडडे मील समेत अन्य मामलों में एक शिक्षक को निलंबित किया जा चुका है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जांच में दोषी पाए जाने के बावजूद इस बार संबंधित अध्यापक को क्यों बचाया जा रहा है।

*निष्पक्ष कार्रवाई की मांग*

ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले में निष्पक्ष जांच कराते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो इससे शिक्षा व्यवस्था और सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर असर पड़ेगा।

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