अहमदाबाद, गुजरात
इंडिया की सोच बुलंद न्यूज़ की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात की सांस्कृतिक और आर्थिक राजधानी अहमदाबाद में मानवता की सेवा का एक अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया गया है। 'चर्च ऑफ गॉड वर्ल्ड मिशन सोसाइटी' द्वारा 'फसह के प्रेम के द्वारा जीवन देने के लिए 1828वीं विश्व रक्तदान ड्राइव' के अंतर्गत एक भव्य सामूहिक रक्तदान कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस पुनीत कार्य में चर्च के स्वयंसेवकों और स्थानीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी कर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन किया।
प्रधान पादरी किम जू चिअल के मार्गदर्शन में 1828वां वैश्विक अभियान
चर्च के आधिकारिक प्रवक्ता ने इस अवसर पर कहा कि रक्त एक ऐसी संजीवनी है जिसे कृत्रिम रूप से निर्मित नहीं किया जा सकता। गंभीर परिस्थितियों में मरीजों की जान बचाने का एकमात्र विकल्प स्वस्थ व्यक्तियों द्वारा किया गया स्वैच्छिक रक्तदान ही है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य स्थानीय अस्पतालों में रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करना और समाज में नि:स्वार्थ सेवा की संस्कृति को बढ़ावा देना है।
'फसह' (Passover) की आध्यात्मिक प्रेरणा और सेवा संकल्प
सिविल अस्पताल प्रशासन ने की सराहना: 24,000 मिलीलीटर रक्त संग्रहित
रविवार की सुबह 10:00 बजे से ही सिविल अस्पताल परिसर में रक्तदाताओं का तांता लगा रहा। चिकित्सा विशेषज्ञों की देखरेख में सभी प्रोटोकॉल का पालन करते हुए कुल 60 पात्र रक्तदाताओं ने सफलतापूर्वक रक्तदान किया, जिससे कुल 24,000 मिलीलीटर रक्त एकत्रित हुआ।
इस मानवीय पहल का स्वागत करते हुए सिविल अस्पताल के सुपरिटेंडेंट डॉ. राकेश जोशी ने संस्था के प्रयासों की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा, "चर्च ऑफ गॉड वर्ल्ड मिशन सोसाइटी का यह कार्य अत्यंत सराहनीय है। हमारे ट्रॉमा सेंटर में प्रतिदिन सैकड़ों घायल मरीज आते हैं जिन्हें तत्काल रक्त की आवश्यकता होती है। ऐसे समय में संस्था द्वारा किया गया यह सहयोग अनमोल है।" उन्होंने आगे कहा कि संस्था के सिद्धांत और समाज की मदद करने की उनकी सोच वास्तव में प्रेरणादायक है।
वहीं, IHBT ब्लड बैंक की अध्यक्ष डॉ. निधि भटनागर ने भी अपना आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्था द्वारा किया जा रहा यह कार्य समाज के लिए अत्यंत लाभकारी है और भविष्य में भी अस्पताल प्रशासन हर संभव सहयोग के लिए तत्पर रहेगा।
स्वर्गीय माता की शिक्षाओं से प्रेरित है सेवा भाव
चर्च के अध्यक्ष श्री रोलेंड फ्रैंक ने इंडिया की सोच बुलंद न्यूज़ से बात करते हुए बताया कि चर्च ऑफ गॉड वर्तमान में विश्व के 175 देशों में सक्रिय है। उन्होंने साझा किया कि दूसरों के जीवन की रक्षा करने का यह संस्कार उन्हें 'स्वर्गीय माता नई यरुशलेम' की शिक्षाओं से प्राप्त हुआ है। संस्था का मानना है कि अपने पड़ोसी से प्रेम करना ही सच्ची मानवता है।
वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर चर्च ऑफ गॉड का योगदान
बता दें कि 'चर्च ऑफ गॉड वर्ल्ड मिशन सोसाइटी' के पास वर्तमान में 175 देशों में 7,800 से अधिक केंद्र हैं और इसके सदस्यों की संख्या 40 लाख से अधिक है। संस्था अब तक पर्यावरण संरक्षण, आपदा राहत और सामाजिक कल्याण की 45,000 से अधिक गतिविधियां संचालित कर चुकी है। इन उत्कृष्ट कार्यों के लिए इन्हें अमेरिका के 'राष्ट्रपति स्वयंसेवा पुरस्कार' और ब्रिटेन की 'रानी के स्वयंसेवा पुरस्कार' सहित 5,600 से अधिक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।
भारत में भी यह संस्था तमिलनाडु, सिक्किम, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में स्वच्छता अभियान, स्वास्थ्य सहायता और सामाजिक सशक्तिकरण के कार्यों में निरंतर सक्रिय है, जिसकी सराहना विभिन्न राज्य सरकारों और मंत्रियों द्वारा समय-समय पर की गई है।




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