उत्तर प्रदेश के कुशीनगर से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। एक नवजात शिशु को गन्ने के खेत में झोले में डालकर फेंक दिया गया। सोचिए, जिसने अभी दुनिया देखना भी शुरू नहीं किया, उसे इस तरह मौत के हवाले छोड़ दिया गया।
मासूम की आवाज सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुँचे और उसे सुरक्षित घर ले आए — यही इस अंधेरे में इंसानियत की एक छोटी सी रोशनी है।
लेकिन सवाल अब भी खड़ा है —
9 महीने तक एक ज़िंदगी को अपने अंदर रखने के बाद, आखिर कैसे कोई उसे यूँ फेंक सकता है?
क्या हमारी संवेदनाएं इतनी मर चुकी हैं?
हवस की भूख में किसी मासूम की ज़िंदगी से खेलना सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि मानवता पर एक काला धब्बा है।
जरूरत है सोच बदलने की, जिम्मेदारी समझने की, और ऐसी घटनाओं के खिलाफ आवाज उठाने की।
इंडिया की सोच बुलंद की लिए राहुल गुलशन की रिपोर्ट

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