अयोध्या: राम मंदिर के नाम पर जमीन कब्जाने का खेल? ब्रह्मकुंड गुरुद्वारा के पास 'नानक सदन' निर्माण पर भूमाफियाओं के खिलाफ गंभीर आरोप

 अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम की नगरी अयोध्या में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां राम मंदिर की आड़ लेकर पैतृक भूमि पर अवैध कब्जे के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। 'इंडिया की सोच बुलंद न्यूज़' को मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस लाइन निवासिनी डॉ. अमरजीत कौर और उनके भाई करमजीत सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से प्रशासन और भूमाफियाओं के कथित गठजोड़ पर अपनी पीड़ा व्यक्त की है।

फर्जी वसीयतनामा और न्यायालय में विचाराधीन मामला

पीड़ित परिवार का आरोप है कि ब्रह्मकुंड गुरुद्वारा के निकट स्थित उनकी पैतृक भूमि को हड़पने के लिए कूटनीतिक और फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया जा रहा है। डॉ. अमरजीत कौर ने प्रेस वार्ता में बताया कि उनके दिवंगत पिता किशन सिंह के नाम पर कथित रूप से एक फर्जी वसीयतनामा तैयार किया गया है।

पीड़ितों के अनुसार, ज्ञानी गुरजीत सिंह, महंत बलजीत सिंह, सुरजीत सिंह, चरणजीत सिंह और कुलजीत सिंह सहित अन्य लोग इस कृत्य में शामिल हैं। 'इंडिया की सोच बुलंद न्यूज़' को डॉ. कौर ने बताया कि वसीयतनामे की सत्यता का मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है। इसके बावजूद, आरोपियों द्वारा बिना किसी कानूनी भय के जमीन पर अवैध निर्माण कार्य जारी रखा गया है।

नजूल की भूमि और मानचित्र नियमों की अनदेखी

पीड़ित परिवार का दावा है कि संबंधित भूमि सरकारी अभिलेखों में नजूल की है और उनके पिता किशन सिंह के नाम दर्ज है। गंभीर आरोप यह भी है कि विपक्षी गणों द्वारा बिना किसी सक्षम प्राधिकारी या विकास प्राधिकरण से मानचित्र स्वीकृत कराए ही दुकानों और भवनों का निर्माण कराया जा रहा है।

हाल ही में मीडिया में यह प्रचारित किया गया कि उक्त भूमि पर 'नानक सदन' का निर्माण हो रहा है और इसे राम मंदिर के कार्यों से जोड़कर पेश किया गया। डॉ. अमरजीत कौर का आरोप है कि यह केवल प्रशासनिक कार्रवाई से बचने और धार्मिक भावनाओं की आड़ लेकर जमीन दबाने का एक सुनियोजित तरीका है।

'पंजाबी रसोई' और नगर निगम की प्रक्रिया पर आपत्ति

पीड़ित पक्ष के अनुसार, इसी विवादित भूमि पर सुरजीत सिंह द्वारा 'पंजाबी रसोई' नामक रेस्टोरेंट का संचालन भी शुरू कर दिया गया है। 'इंडिया की सोच बुलंद न्यूज़' को यह भी ज्ञात हुआ है कि नगर निगम में नामांतरण (म्यूटेशन) की प्रक्रिया पर पीड़ित परिवार की आपत्ति के बाद वर्तमान में रोक लगा दी गई है। इसके बावजूद धरातल पर निर्माण और कब्जे की गतिविधियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं।

प्रशासनिक उदासीनता और सुरक्षा की गुहार

डॉ. अमरजीत कौर और करमजीत सिंह ने बताया कि उन्होंने अयोध्या विकास प्राधिकरण, नजूल विभाग और जिलाधिकारी को कई बार लिखित प्रार्थना पत्र दिए हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। स्थिति यहाँ तक पहुँच गई है कि पीड़ित परिवार को अपने ननिहाल में शरण लेनी पड़ रही है।

पीड़ितों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और अवैध कब्जों को तुरंत ध्वस्त किया जाए। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि उनके परिवार के साथ कोई अनहोनी होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी विपक्षी गणों और स्थानीय प्रशासन की होगी।

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