खागा, फतेहपुर । प्रशासन की लापरवाही के चलते एक युवक असमय मृत्यु के आगोश में समा गया। जबकि नगर में लंबे अरसे से ओवरलोड वाहनों की नो एंट्री की मांग लगातार किया जा रहा है। अगर बेबाकी से कहा जाए तो युवा की मौत का जिम्मेदार स्थानीय प्रशासन ही है।
बताते चलें कि तत्कालीन जिला अधिकारी ने नगर में बड़े वाहनों की नो एंट्री का फरमान जारी किया था अधिकारी गये तो नियम भी गया और निर्वाध रात दिन ओवरलोड मोरम वाहनों का आवागमन चल रहा है जिसके चलते एक परिवार का दीपक बुझ गया। प्रश्न यह उठता है कि इसका जिम्मेदार आखिर कौन होगा। जानकारी के अनुसार नगर के व्यापारी नरसिंह का पुत्र देर शाम समोसा लेने गया था तभी वह बेकाबू ओवरलोड मोरम वहान से दुर्घटनाग्रस्त होकर मौत के आगोश में समा गया। स्थानीय पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचकर कानूनी खानापूर्ति करके शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। वहीं परिजनों का रो रो कर बुरा हाल हो रहा है लेकिन संवेदनहीन स्थानीय प्रशासन केवल कानूनी दांवपेंच तक सीमित है। इस प्रकार खागा नगर में प्रतिवर्ष अनेक लोगों की ओवरलोड वाहनों से जाने जा रही हैं लेकिन स्थानीय प्रशासन केवल कानूनी दांवपेंच तक ही सीमित है। जबकि स्थानीय व्यापारियों में लगातार आक्रोश बना है। ओवरलोड मोरम वहानो पर नो एंट्री लागू किया जाए लगभग आधा दर्जन विद्यालयों के छात्र-छात्राएं स्कूल छुट्टी होते ही सड़कों पर निकल पड़ते हैं और दुर्घटनाओं की आशंका हमेशा बनी रहती लेकिन प्रशासन स्वविवेक छोड़िए मांगों पर भी कोई ध्यान नहीं दे रहा और लोग बेमौत मारे जा रहे हैं।
जनपद मुख्यालय सहित बड़ी संख्या में नगरों, कस्बो में संचालित हो रहे अवैध नर्सिंग होम
- नाक के नीचे संचालित अवैध नर्सिंग होमो को दे रहे अभयदान
- जांच के नाम पर मरीज के जीवन के साथ हो रहे खिलवाड़ को किया जा रहा है रफा-दफा
- छुटपुट कार्रवाई करके जिम्मेदार थपथपा रहे हैं अपनी पीठ
फतेहपुर। मुख्यालय सहित जनपद के तीनों तहसील एवं छोटे बड़े विभिन्न छोटे बड़े कस्बो में बेसमेंट के अंदर चल रहे अवैध हस्पिटल जिम्मेदार जेब गर्म करके क्लीन चिट दे रहे हैं। मानक विहीन अवैध तरीके से बेसमेंट में हॉस्पिटल, नर्सिंगहोम के रूप में मौत की दुकान जगह देखने को मिल जाएंगे जबकि लाखों रुपए स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदार अधिकारी ता के नाम पर जेब गर्म कर रहे हैं लेकिन उनको इस तरह के अवैध मौत की दुकान नहीं दिखाई पड़ रही है। जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल में संविदा कर्मी के पद पर तैनात कर्मी ने बेसमेंट को हॉस्पिटल में बना डाला है। संचालक ने अपना ऑफिस इस तरीके बना रखा है कि जैसे जिला चिकित्सा अधिकारी का हो।नगर में चल रहे बेसमेंट में हॉस्पिटल के ऊपर किसी की नजर नहीं पड़ रही है। ये लोग इलाज व जाँच के नाम पर मरीजों से मोटी रकम वसूलते है। बिना किसी डिग्री के चला रहे नर्सिंग होम हॉस्पिटल के चलते गलत इलाज के कारण आए दिन मरीज को जान से धोना पड़ता है। अवैध तरीके से संचालित हो रहे ये अस्पताल मरीजों के साथ खिड़वाड कर रहे हैं। बावजूद इसके इन अस्पतालों में कार्यवाही करने से जिम्मेदार कतरा रहे हैं। जनपद मुख्यालय, तहसील मुख्यालयों व कस्बों में जगह जगह मौत की दुकानें सजी नजर आ रहे हैं। कस्बों में सैकड़ो की तादाद मे निजी नर्सिंग होम अवैध तरीके से संचालित हो रहे हैं। संचालित हो रहे इन अस्पतालों में मरीजों का तांता लगा रहता है। अवैध तरीके से संचालित मानक विहीन नर्सिंग होमो में सुविधाएं पूरी तरह से धड़ाम हैं। बड़ी संख्या में अवैध तरीके से संचालित इन नर्सिंग होम संचालक डाक्टरों के पास डिग्री भी उपलब्ध नहीं है। यहां बैठे अधिकतर डाक्टर झोलाछाप हैं। इन अवध नर्सिंग होम में आए दिन मरीज के साथ हो रही दुर्घटना में आल्हा अधिकारी सहित जिम्मेदार प्रशासन मोटी रकम से जब गर्म करके जांच के नाम पर मामले को रफा- दफा कर रहे हैं। वही इन नर्सिंग होमो के आसपास अवैध पैथोलॉजी की मदद से मरीजों की फर्जी रिपोर्ट बनाकर मोटी रकमें वसूल कर रहे हैं। हालत तो यह है की ही अवैध नर्सिंग होमो में बड़े-बड़े ऑपरेशन तक भी किया जा रहा है। जबकि प्राथमिक सुविधाएं ही इन नर्सिंग होमो से कोसों दूर है। वही ऑपरेशन के नाम पर मोटी-मोटी रकमें वसूल करके लोगों के जीवन से खिलवाड़ किया जा रहा है।वही के संबंध में डिप्टी सीएमओ इस्तियाक अहमद से बात करने पर वही रहता हटाया जवाब की जांच करके अवैध नर्सिंग होमो पर कड़ी कार्यवाही किया जाएगा।
आशुतोष बाजपेई ग्राउंड रिपोर्ट फतेहपुर

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