अयोध्या। कानूनन प्रेस कार्ड जारी करने का अधिकार केवल उन्हीं संस्थानों को है जो भारतीय समाचार पत्र पंजीयक पीआरजीआई में पंजीकृत समाचार पत्र हैं या सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से लाइसेंस प्राप्त उपग्रह चैनल हैं। 'प्रेस और पत्र-पत्रिका पंजीकरण अधिनियम 2023' के लागू होने के बाद अब नियम और भी स्पष्ट हो गए हैं। केवल फेसबुक जैसे मंच पर पृष्ठ बना लेना या इंटरनेट आधारित प्रसारण पर चैनल चलाना और स्वयं को 'संपादक' घोषित कर देना आपको 'प्रेस' शब्द के इस्तेमाल या पहचान पत्र बांटने का कानूनी अधिकार नहीं देता। वर्तमान नियमों के अनुसार, केवल वही संस्थान अपने डिजिटल या इंटरनेट माध्यमों के लिए पत्रकार नियुक्त कर सकते हैं जिनका पंजीकरण आधिकारिक तौर पर 'प्रेस सेवा पोर्टल पर पूर्ण है। जो लोग बिना पंजीकरण के फर्जी कार्ड बांटकर पत्रकार बना रहे हैं, उनके विरुद्ध सरकार और न्यायालय अब अत्यंत सख्त हैं और बड़े स्तर पर कानूनी कार्यवाही की तैयारी की जा चुकी है। नए सूचना प्रौद्योगिकी नियम 2021 के अनुसार सामाजिक माध्यमों और इंटरनेट मंचों पर खबर दिखाना मात्र एक 'डिजिटल सामग्री' है, जो तब तक आधिकारिक पत्रकारिता का दर्जा नहीं पाती जब तक वह संस्था पंजीकृत न हो। बिना वैध पंजीकरण के अवैध रूप से प्रेस कार्ड बांटना अब भारतीय न्याय संहिता की धारा 318 धोखाधड़ी और धारा 336 जालसाजी के तहत एक गंभीर दंडनीय अपराध है। यहाँ यह समझना आवश्यक है कि पत्रकार की नियुक्ति उसकी पंजीकृत संस्था द्वारा की जाती है, जबकि सरकार का सूचना विभाग केवल पात्रता के आधार पर 'मान्यता प्राप्त कार्ड' जारी करता है। बिना पंजीकरण के कोई भी व्यक्ति खुद को पत्रकार बताकर कार्ड जारी नहीं कर सकता ऐसा करना कानून की दृष्टि में गंभीर फर्जीवाड़ा है। आजकल बड़े मीडिया संस्थानों ने भी अपने नियमों को अत्यंत कड़ा कर दिया है। यदि आप किसी प्रतिष्ठित समाचार चैनल या अखबार में नौकरी कर रहे हैं तो आप अपनी संस्था के साथ एक कानूनी 'सेवा अनुबंध' से बंधे होते हैं। इस अनुबंध के तहत जब तक आप उस संस्था से वेतन ले रहे हैं, आप किसी अन्य चैनल पत्र या अपने निजी सामाजिक माध्यमों के खातों के द्वारा स्वतंत्र रूप से खबरें नहीं दिखा सकते, क्योंकि यह हितों के टकराव' का मामला बनता है। नियमों के अनुसार, यदि कोई पत्रकार अपनी संस्था में रहते हुए निजी तौर पर खबरें प्रसारित करता है तो उसकी शिकायत संबंधित संस्थान में की जा सकती है। यही कारण है कि जैसे ही कोई कर्मचारी अपनी संस्था की अनुमति के बिना निजी पृष्ठ बनाकर कार्य शुरू करता है उसे तत्काल सेवामुक्त किया जा सकता है क्योंकि वह अनुबंध की शर्तों और संस्था के प्रति अपनी व्यावसायिक निष्ठा का पालन नहीं कर रहा होता।
इंडिया की सोच बुलंद से तहसील रिपोर्टर ज्ञानेंद्र तिवारी अयोध्या
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