सबसे छोटी तहसील बनकर रह गई बल्दीराय; भौगोलिक सुगमता को दरकिनार करने का आरोप
जय प्रकाश सिंह
सुलतानपुर।
जनपद की नव-निर्मित पांचवीं तहसील बल्दीराय एक बार फिर राजनीतिक फैसलों और प्रशासनिक फेरबदल की भेंट चढ़ गई है। वर्ष 2016 में तत्कालीन विधायक अबरार अहमद के प्रयासों और तमाम विरोधाभासों के बीच अस्तित्व में आई यह तहसील, नौ वर्षों के भीतर ही अपने मूल स्वरूप से काफी सिमट गई है। कभी 217 गांवों के साथ शुरू हुई यह तहसील अब मात्र 160 गांवों तक सीमित होकर जिले की सबसे छोटी तहसील बन गई है।
कैसे बिगड़ा प्रशासनिक संतुलन?
तहसील की स्थापना के समय शासन ने धनपतगंज ब्लॉक के सराय गोकुल एवं मायंग सर्किल को इसमें शामिल कर आवश्यक कोरम पूरा किया था। पिछले नौ वर्षों से कामकाज सुचारू रूप से चल रहा था, लेकिन हालिया प्रशासनिक और राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण इन 57 गांवों को पुनः सदर तहसील (सुलतानपुर) में जोड़ दिया गया है। इस निर्णय से बल्दीराय तहसील का भौगोलिक ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है।
दूरी का तर्क भी पड़ा कमजोर
स्थानीय जानकारों का तर्क है कि दूरी को आधार बनाकर लिया गया यह फैसला तर्कसंगत नहीं है। आंकड़ों के अनुसार:
- मायंग सर्किल से सदर (सुलतानपुर) की दूरी: लगभग 22 किलोमीटर।
- मायंग सर्किल से बल्दीराय तहसील की दूरी: मात्र 16 किलोमीटर।
विशेषकर मायंग सर्किल के पश्चिमी गांवों के ग्रामीणों के लिए बल्दीराय तहसील अधिक सुलभ और नजदीक थी। अब सदर तहसील मुख्यालय जाने के लिए ग्रामीणों को न केवल अधिक दूरी तय करनी होगी, बल्कि उनके समय और धन का भी अपव्यय होगा।
नेतृत्व पर सवाल और जनता में मायूसी
इस पूरे प्रकरण में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की चुप्पी सबसे अधिक चर्चा का विषय बनी हुई है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि बल्दीराय क्षेत्र हमेशा से सशक्त नेतृत्व के अभाव से जूझता रहा है। लोगों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि क्षेत्रीय हितों की अनदेखी की जा रही है और जनप्रतिनिधि केवल चुनावी समय में ही सक्रिय नजर आते हैं।
भविष्य पर प्रश्नचिह्न
57 गांवों के कट जाने से बल्दीराय तहसील के वजूद और उसके भविष्य के विकास पर प्रश्नचिह्न लग गया है। अब क्षेत्र की जनता यह सवाल पूछ रही है कि क्या शासन-प्रशासन इस विसंगति पर दोबारा विचार करेगा, या यह तहसील केवल कागजों पर 'सबसे छोटी तहसील' का तमगा लेकर सिमटी रहेगी?
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