कौशांबी। जनपद के विभिन्न थाना क्षेत्रों से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ भांग के सरकारी ठेकों की आड़ में अवैध रूप से गांजे की बिक्री की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, सराय अकील, पीपरी, चरवा और संदीपन घाट जैसे क्षेत्रों में यह अवैध धंधा लंबे समय से फल-फूल रहा है। कई बार सोशल मीडिया पर इसके वीडियो वायरल होने के बावजूद, संबंधित विभागों और जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
दबाव और धमकियों का खेल
हैरानी की बात यह है कि जब भी इस अवैध कारोबार की पोल खोलने वाले वीडियो सामने आते हैं, तो दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय साक्ष्यों को मिटाने का दबाव बनाया जाता है। आरोप है कि वीडियो डिलीट कराने के लिए धमकियाँ दी जाती हैं और रसूखदारों की 'पैरवी' के जरिए मामलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। इसी प्रशासनिक शिथिलता के कारण नशे के सौदागरों के हौसले बुलंद हैं।
बर्बाद होते परिवार और युवाओं का भविष्य
स्थानीय निवासियों का कहना है कि गांजे और अन्य नशीले पदार्थों की सुलभ उपलब्धता ने जिले के युवाओं को दलदल में धकेल दिया है। नशे की लत के कारण कई हंसते-खेलते परिवार तबाह हो गए हैं और कई माताओं ने अपने बेटों को खो दिया है। जनता का आरोप है कि इस मानवीय त्रासदी के बावजूद प्रशासन की गंभीरता केवल कागजों तक सीमित है।
चौथे स्तंभ पर प्रहार
रिपोर्ट के अनुसार, इस काले कारोबार के खिलाफ आवाज उठाने वाले पत्रकारों को भी निशाना बनाया जा रहा है। पत्रकारों के साथ अभद्रता, मारपीट और उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकियाँ आम बात हो गई हैं। कलम को दबाने की इन कोशिशों में कहीं न कहीं स्थानीय तंत्र की मिलीभगत की आशंका भी जताई जा रही है।
कानून-व्यवस्था पर सवाल
जनपद में बढ़ता नशे का यह जाल न केवल सामाजिक बुराई है, बल्कि कानून-व्यवस्था के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन गया है। अब देखना यह होगा कि उच्चाधिकारी इस रिपोर्ट का संज्ञान लेकर धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई करते हैं या फिर अवैध नशे का यह कारोबार यूँ ही बेखौफ चलता रहेगा।
रिपोर्ट: आशुतोष बाजपेई (ग्राउंड रिपोर्ट)

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