निकाह को सादगी और कम से कम खर्च के साथ करने की अपील मौलाना उस्मान कासमी*

 


*बिना दहेज़ के निकाह हुआ संपन्न*

*सादगी की मिशाल हुई पेश*

*तारिक खान का निकाह (विवाह) समाज के लिए बना आईना*

सुल्तानपुर बल्दीराय तहसील क्षेत्र के गौरा बरामऊ ने एक फिर नई मिशाल कायम की। निकाह इस्लाम में एक महत्वपूर्ण और पवित्र फ़रायज़ है, जो दो लोगों को जीवन भर के लिए एक साथ जोड़ता है। बल्दीराय तहसील के ग्राम गौरा बरामऊ में निकाह की एक ऐसी मिसाल देखने को मिली जो समाज के लिए एक आईना है तारिक खान का निकाह अरशद पवार की लड़की आयशा से हुआ जो बिना बारात और बिना दहेज के देखी गई ऐसे बिगड़े हुए समाज में जहां दहेज के बिना कितनी लड़कियों की शादियां रुकी हुई है और जो हो भी रही है करने वाले लोग कर्ज में डूब रहे हैं।समाज में बुराइयां पैदा हो रही है ऐसे में ऐसी भी शादियां हो रही है जो ऐसे बिगड़े हुए समाज के लिए एक आईना है जिसकी चर्चा एक अच्छी सोच की पहल है इस निकाह में सिर्फ कुछ ही लोग बिना किसी ताम झाम के मस्जिद में निकाह हो गया। इस मौके पर मौलाना उस्मान ने बताया कि निकाह या शादी सबसे अच्छी शादी वहीं है जिसमें कम से कम खर्चे मे हुआ हो मौलाना ने मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की बेटी की शादी हजरत फातिमा की शादी हजरत अली से निकाह किया गया जिसमें चंद ही सहाबी (साथी) शामिल हुए थे। मौलाना ने कहा कि लड़की और लड़का दोनों को शादी की जरूरत होती है लेकिन यह कहां का इंसाफ है कि लड़की वाले से ही सौदेबाजी किया जाता है और ज्यादा से ज्यादा दहेज के नाम पर वसूली की जाती है लड़की वाले को सबसे छोटा समझ जाता है। इस मौके पर मौलाना द्वारा की गई नसीहत और सादगी वाली शादी देखकर कई लोगों ने अहद किया कि अब ऐसी ही शादी की जाएगी समाज में अमीरों के साथ-साथ गरीबों की भी बच्चियों को अच्छा रिश्ता मिल जाएगा और दहेज (जहेज) के लिए कोई बच्चिया बिन ब्याही नहीं रहेंगी लड़के या लड़कियों के गार्जियन बच्चों को बोझ नहीं समझेंगे एक अच्छा समाज सामने आयेगा।

इंडिया की सोच बुलंद से सुनील सिंह की रिपोर्ट

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