सुल्तानपुर। अवैध तरीके से खड़ा कर दिया गया लेखपाल संघ भवन अब सिर्फ़ ईंट-पत्थर का ढेर नहीं, बल्कि अधिकारियों की हिम्मत का लिटमस टेस्ट बन गया है। भवन अवैध है ये सब जानते हैं। लेकिन नोटिस किसे भेजना है ये कोई नहीं जानता।
तहसीलदार सदर के नाम नोटिस काटने की बात उठते ही अफसरों के हाथ ऐसे काँप जाते हैं, मानो कोई उन्हें नोटिस नहीं, इस्तीफ़ा लिखने को कह रहा हो। बंद कमरे में मातहतों पर गुस्सा ऐसे बरसाया जा रहा है जैसे अवैध भवन नहीं, मातहत ही रात में ईंट-सीमेंट ढोकर ले आए हों।
पाँच महीने से अवर अभियंता विनियमित क्षेत्र दौड़–दौड़कर उपजिलाधिकारी सदर से हस्ताक्षर कराने की कोशिश कर रहे हैं।
पर सहाब हैं कि नोटिस पर साइन करने से ऐसे बच रहे हैं जैसे नोटिस नहीं, बाकायदा बम हो।
प्रशासन की हालत कुछ यूँ है भवन अवैध है, नोटिस तैयार है, हस्ताक्षर करने वाला गायब है…और जनता यही सोच रही है कि आखिर कानून कमजोर है या अफसरों के इरादे।
अब असली सवाल यह है कि अवैध भवन को गिराने की नोटिस किसे भेजी जाए भवन को या उन अफसरों को जो पाँच महीने से हिम्मत जुटाने में ही व्यस्त हैं?
इंडिया की सोच बुलंद से सुल्तानपुर जिला रिपोर्टर सुनील सिंह की रिपोर्ट

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