बल्दीराय/सुल्तानपुर (यूपी): कहते हैं कि प्रतिभा कभी संसाधनों की मोहताज नहीं होती। अगर हौसले बुलंद हों और इरादे नेक, तो अभावों की तपिश भी इंसान को कुंदन बना देती है। इंडिया की सोच बुलंद न्यूज़ आज आपको एक ऐसी ही शख्सियत से रूबरू करा रहा है, जिन्होंने उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव से निकलकर सात समंदर पार भारत का मान बढ़ाया है।
संघर्षों से भरा रहा बचपन
सुलतानपुर जिले के बल्दीराय तहसील अंतर्गत हलियापुर गांव के मूल निवासी राजकुमार आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। वर्तमान में न्यूयॉर्क में एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत राजकुमार का बचपन बेहद सादगी और मुफलिसी में बीता। उनके पिता, स्वर्गीय मंजूर अली, गांव में पटाखे बनाने का काम करते थे, जबकि उनकी मां घर-घर जाकर महिलाओं को चूड़ियां पहनाती थीं। लेकिन माता-पिता ने राजकुमार की शिक्षा में कभी कमी नहीं आने दी।
शिक्षा और करियर का सफर
राजकुमार की शुरुआती शिक्षा हलियापुर में हुई, जिसके बाद उन्होंने अयोध्या से इंटरमीडिएट और लखनऊ विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। इंडिया की सोच बुलंद न्यूज़ के कीबोर्ड से यह बात स्पष्ट है कि उनकी मेहनत का ही फल था कि 1996 में उन्हें अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में अवसर मिला।
कैंसर रिसर्च को बनाया जीवन का लक्ष्य
राजकुमार की इस सफलता के पीछे एक भावुक कहानी भी छिपी है। उन्होंने बताया कि उनकी माता का निधन कैंसर की वजह से हुआ था। मां को खोने के उस दर्द ने उन्हें इस जानलेवा बीमारी के खिलाफ शोध करने के लिए प्रेरित किया।
"अपनी मातृभूमि और अपनी मां के प्रति प्रेम ही मुझे शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने की शक्ति देता है। अमेरिका में बेहतर रिसर्च सुविधाओं के कारण मैंने वहां आवेदन किया था, ताकि मानवता के लिए कुछ ठोस काम कर सकूं।" - राजकुमार
वर्तमान उपलब्धियां
पद: चेयरमैन, फार्मास्युटिकल एंड बायोमेडिकल साइंसेज (कैंसर विभाग), न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी ऑफ ट्यूरो।
पारिवारिक गौरव: उनकी पत्नी शगुफ्ता भी न्यूयॉर्क में प्रोफेसर हैं। उनके भाई मकसूद रियाद की किंग सऊद यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं।
सामाजिक सद्भाव: राजकुमार का नाम उनके पिता के हिंदू समुदाय के साथ घनिष्ठ संबंधों और आपसी भाईचारे की मिसाल है।
एक सुरक्षित और सकारात्मक संदेश
वर्तमान में दो सप्ताह के प्रवास पर अपने गांव आए राजकुमार युवाओं के लिए एक जीवंत उदाहरण हैं। इंडिया की सोच बुलंद न्यूज़ इस उपलब्धि को न केवल एक व्यक्तिगत सफलता मानता है, बल्कि यह पूरे भारत और सुलतानपुर जिले के लिए गौरव का क्षण है।
रिपोर्ट: जय प्रकाश सिंह
संपादन: न्यूज़

0 Comments
Comments