आबकारी विभाग की लापरवाही से बेलगाम शराब ठेके*


 *सुल्तानपुर: विशेष रिपोर्ट*

*निर्धारित समय के बाद भी ठेके रहते हैं गुलजार*

*पानी-गिलास के साथ ही शराब के शौकीनों को चख्ने की व्यवस्था मिलती है ठेकों पर*

*बियर में जमकर हो रही ओवर रेटिंग,विभाग बना धृतराष्ट्र*

जनपद सुल्तानपुर में आबकारी विभाग की कथित शिथिलता के चलते शराब ठेकों और बारों की गतिविधियाँ सवालों के घेरे में हैं। आरोप है कि जिले के कई प्रमुख स्थानों—राहुल टॉकीज, रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, मंडी परिसर, पुलिस लाइन, डाकखाना रोड, करोदिया, नेशनल टॉकीज सहित अन्य इलाकों में स्थित शराब के ठेके निर्धारित समय समाप्त होने के बाद भी खुले रहते हैं, और देर रात तक गुलजार दिखाई देते हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ठेकों पर शराब के साथ पानी और गिलास के साथ चख्ने की भी बिक्री खुलेआम की जा रही है, जबकि यह आबकारी नियमों का सीधा उल्लंघन है। साथ ही, निर्धारित दरों से अधिक पैसे वसूले जाने के भी आरोप सामने आए हैं।

नियम क्या कहते हैं?

उत्तर प्रदेश आबकारी अधिनियम एवं शासनादेशों के अनुसार—

शराब की खुदरा बिक्री निर्धारित समय सीमा के भीतर ही की जा सकती है।

ठेके के भीतर या आसपास बैठकर पिलाना, गिलास-पानी जैसी सहायक वस्तुओं की बिक्री कर स्थल पर सेवन को बढ़ावा देना निषिद्ध है (जब तक लाइसेंस की शर्तों में विशेष अनुमति न हो)।

आबकारी विभाग का दायित्व है कि नियमित निरीक्षण, समयबद्ध बंदी और दरों की निगरानी सुनिश्चित करे।

उल्लंघन पाए जाने पर जुर्माना, लाइसेंस निलंबन/निरस्तीकरण तक की कार्रवाई का प्रावधान है।

निरीक्षण पर सवाल

आरोप है कि आबकारी इंस्पेक्टर फोन नहीं उठाते, जबकि दुकानों की नियमित चेकिंग नहीं होती। इससे ठेकेदारों के हौसले बुलंद हैं और नियमों की अनदेखी लगातार जारी है। लोगों का कहना है कि यदि समय पर कार्रवाई होती, तो सार्वजनिक स्थानों पर देर रात तक चल रही गतिविधियों पर अंकुश लगता।

प्रशासनिक जवाबदेही

सूत्रों के मुताबिक जिला आबकारी अधिकारी कार्यालय में नियमित रूप से उपलब्ध नहीं रहते और विभागीय कार्यों के निस्तारण को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, यह आरोप हैं—इनकी औपचारिक पुष्टि संबंधित अधिकारियों से अपेक्षित है।

आबकारी विभाग का वर्जन

इस मामले में जिला आबकारी अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनसे संपर्क नहीं हो सका। विभागीय पक्ष मिलने पर उसे यथाशीघ्र प्रकाशित किया जाएगा।

जनहित का प्रश्न

रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में मानक समय के बाद शराब बिक्री न केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि सामाजिक सुरक्षा से भी जुड़ा मुद्दा है। नागरिकों ने उच्चाधिकारियों से सख्त कार्रवाई, औचक निरीक्षण और पारदर्शी प्रवर्तन की मांग की है।

नोट: यह रिपोर्ट प्राप्त शिकायतों और स्थलीय जानकारी पर आधारित है। किसी भी पक्ष का आधिकारिक बयान प्राप्त होने पर उसे समान महत्व के साथ प्रकाशित किया जाएगा।

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