अवैध नर्सिंग होम पर स्वास्थ्य विभाग की मेहरबानी भारी, चांदा में नवजात की मौत से मचा हड़कंप सर्वेश कुमार सिंह*

सुलतानपुर।* 

जनपद सुलतानपुर में अवैध रूप से संचालित निजी नर्सिंग होम और चिकित्सालय एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। जिले के कई क्षेत्रों में बिना पंजीकरण और आवश्यक मानकों के चल रहे नर्सिंग होम न केवल नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं, बल्कि आमजन की जान के लिए भी खतरा बनते जा रहे हैं।

सूत्रों और स्थानीय लोगों के अनुसार सुलतानपुर सदर, कादीपुर, कूरेभार, लंभुआ, दोस्तपुर और चांदा क्षेत्र में दर्जनों ऐसे निजी नर्सिंग होम संचालित हैं, जिन पर पूर्व में कार्रवाई भी हुई। कुछ मामलों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा लाइसेंस निरस्त किए जाने की बात सामने आई, लेकिन आरोप है कि ऊंची पहुंच और प्रभाव के चलते वही संचालक दूसरे नाम से दोबारा नर्सिंग होम चलाने लगे।

बताया जा रहा है कि इन संस्थानों में दलालों के माध्यम से मरीज भेजे जाते हैं और मोटी कमाई की जा रही है।

चांदा में निजी चिकित्सालय में नवजात की मौत, परिजनों का हंगामा

ताजा मामला चांदा कस्बे का है, जहां मंगलवार को चांदा बाजार क्षेत्र में संचालित एक निजी बाल चिकित्सालय में इलाज के दौरान एक नवजात शिशु की मौत हो गई। घटना के बाद शोकाकुल और आक्रोशित परिजनों ने चिकित्सालय परिसर में हंगामा किया।

परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान लापरवाही बरती गई। हंगामे की स्थिति बनते ही चिकित्सालय में मौजूद चिकित्सक और स्टाफ के मौके से चले जाने की बात भी सामने आई है। सूचना मिलने पर चांदा पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी।

सरकारी अस्पतालों के आसपास ही फल-फूल रहे अवैध नर्सिंग होम

चौंकाने वाली बात यह है कि चांदा क्षेत्र में कई निजी नर्सिंग होम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रतापपुर कमैचा के आसपास ही संचालित हो रहे हैं। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से नियमित निरीक्षण और प्रभावी कार्रवाई न होना विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।

नियम क्या कहते हैं

नियमों के अनुसार किसी भी निजी नर्सिंग होम या चिकित्सालय के लिए—

क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत पंजीकरण

योग्य एवं पंजीकृत चिकित्सक

प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ

नवजात और आपातकालीन सेवाओं की अनुमति

अग्नि सुरक्षा, भवन और स्वच्छता मानक

अनिवार्य हैं।

 *बिना इन मानकों के संचालन दंडनीय अपराध की श्रेणी में* *आता है।* 

अधिकारी का बयान

इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि

“यदि किसी निजी नर्सिंग होम या चिकित्सालय के खिलाफ शिकायत मिलती है तो उसकी जांच कराई जाएगी। जांच में मानक विहीन संचालन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।”

 *स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर सवाल* 

लगातार सामने आ रही घटनाओं के बावजूद अवैध नर्सिंग होम का संचालन यह दर्शाता है कि या तो विभागीय निगरानी कमजोर है या फिर कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित है। *आमजन की मांग है* कि *जिले भर में संचालित* *सभी निजी नर्सिंग होम की* *व्यापक और निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।*

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