अयोध्या के पत्रकारों से निर्णायक आह्वान*


 

*क्रांतिकारी अपील*

*प्रिय साथियो*
कलम की ताकत अगर सत्ता के सामने झुक जाए, तो सच का गला घुट जाता है। अयोध्या में पत्रकारों पर हमला सिर्फ एक व्यक्ति पर नहीं, पूरे लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और निर्भीक पत्रकारिता पर हमला है।

जब तक *डॉ0 बनौधा और उसके गुंडों के खिलाफ स्पष्ट, नामजद एफआईआर दर्ज नहीं होती*
हमलावरों की गिरफ्तारी नहीं होती, पत्रकारों की सुरक्षा की गारंटी नहीं दी जाती, तब तक अयोध्या का *कोई भी स्वाभिमानी पत्रकार*
-किसी सरकारी कार्यक्रम,
-किसी प्रशासनिक प्रेस कॉन्फ्रेंस,
-किसी फोटो सेशन या दिखावटी संवाद में शामिल न हो।
*यह लड़ाई व्यक्ति की नहीं, पेशे की है* आज चुप रहे, तो कल खबर लिखने से पहले इजाज़त लेनी पड़ेगी। *आज नहीं लड़े,तो कल कैमरा उठाने पर लाठी उठेगी।*

यह बहिष्कार मजबूरी नहीं, प्रतिरोध है यह अपील डर की नहीं,
सम्मान और स्वाभिमान की घोषणा है।
*हम सरकार के विरोधी नहीं, लेकिन गुंडों के संरक्षक बन चुके सिस्टम के सामने झुकेंगे भी नहीं।*

एक स्वर, एक संकल्प
FIR नहीं — तो कार्यक्रम नहीं
न्याय नहीं — तो सहयोग नहीं
*अब फैसला हमें करना है*
दरबारी पत्रकार बनना है
या प्रतिरोध की कलम उठानी है

*अयोध्या पत्रकार महासंघ*
इंकलाब ज़िंदाबाद
पत्रकार एकता ज़िंदाबाद
इंडिया की सोच बुलंद से तहसील रिपोर्टर ज्ञानेंद्र तिवारी अयोध्या

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