उन्नाव (उत्तर प्रदेश)। देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, गुणवत्ता और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए 'सातन आर्मी उत्तर प्रदेश' संगठन ने मोर्चा खोल दिया है। सोमवार, 18 मार्च 2026 को संगठन के पदाधिकारियों ने उन्नाव में महामहिम राष्ट्रपति, भारत गणराज्य के नाम एक महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से यूजीसी (UGC) नियमावली 2026 को तत्काल प्रभाव से लागू करने और छात्रों के व्यापक हितों की रक्षा करने की पुरजोर मांग की गई।
चार सूत्रीय मांगों पर केंद्रित रहा ज्ञापन
संगठन द्वारा सौंपे गए मांग पत्र (पंजीकरण संख्या- UNN09046/25-26) में शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन के लिए निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं को रेखांकित किया गया है:
- पारदर्शिता और गुणवत्ता: यूजीसी नियमावली 2026 को देश भर के केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों में कड़ाई से लागू किया जाए, ताकि शैक्षिक मानकों में सुधार हो।
- प्रशासनिक जवाबदेही: विश्वविद्यालयों के भीतर प्रशासनिक सुधारों को प्राथमिकता दी जाए, जिससे छात्रों को बेहतर और सुलभ शैक्षणिक वातावरण मिल सके।
- सामाजिक न्याय और छात्रवृत्ति: SC/ST और पिछड़े वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए छात्रवृत्ति सुविधाओं को और अधिक मजबूत करने तथा आरक्षण नीति का पूर्ण पारदर्शिता के साथ पालन करने की मांग की गई है।
- छात्रों की सहभागिता: शिक्षा के क्षेत्र में लिए जाने वाले महत्वपूर्ण निर्णयों में छात्र संगठनों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
युवाओं और बहुजन छात्रों का मिला समर्थन
ज्ञापन सौंपने के दौरान सातन आर्मी के प्रमुख सदस्यों में आकाश रावत, नीरज कुशवाहा (एडवोकेट), राजेश्वर रावत, विकास वर्मा (एडवोकेट), सूरज कुमार, संदीप रावत, पप्पू गौतम, सतीश कुमार सहित दर्जनों कार्यकर्ता और छात्र मौजूद रहे।
नेताओं ने स्पष्ट किया कि संगठन का उद्देश्य न केवल वर्तमान शिक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर करना है, बल्कि सरकार को सकारात्मक सुझाव देकर देश के भविष्य के लिए एक सुदृढ़ मार्ग प्रशस्त करना भी है।

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