बांदा में लेखपाल की कथित दबंगई पर बवाल: तहसील परिसर को बताया 'निजी जागीर', डीएम की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल

​बांदा/उत्तर प्रदेश: जनपद बांदा की तहसील में तैनात एक लेखपाल के अड़ियल रवैये और विवादित बयानों ने प्रशासनिक गलियारे में हड़कंप मचा दिया है। 'इंडिया की सोच बुलंद न्यूज़' को मिली जानकारी के अनुसार, राजस्व विभाग के कार्यों में लगातार मिल रही शिकायतों और जनता के साथ अभद्र व्यवहार के आरोपों के बीच अब यह मामला सीधे जिलाधिकारी की चौखट तक जा पहुंचा है। ताजा घटनाक्रम ने न केवल कर्मचारी की मर्यादा बल्कि पूरे जिला प्रशासन की साख को दांव पर लगा दिया है।
​जनता दल यूनाइटेड की पदाधिकारी से अभद्रता का आरोप
​पूरा मामला तब गरमाया जब जनता दल यूनाइटेड (JDU) की एक महिला पदाधिकारी जनहित से जुड़े किसी आवश्यक कार्य के सिलसिले में तहसील परिसर स्थित लेखपाल संघ भवन पहुंची थीं। आरोप है कि वहां मौजूद लेखपाल रविंद्र यादव ने उनके साथ गरिमा के विरुद्ध व्यवहार किया। 'इंडिया की सोच बुलंद न्यूज़' के सूत्रों के अनुसार, बातचीत के दौरान लेखपाल ने कथित तौर पर सरकारी संपत्ति यानी लेखपाल संघ भवन को अपनी "निजी संपत्ति" करार दे दिया। इस बयान के बाद स्थानीय राजनीति और सामाजिक संगठनों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
​सरकारी परिसर पर 'निजी स्वामित्व' के दावे से मचा हड़कंप
​कानूनी दृष्टिकोण से तहसील परिसर और उसके भीतर स्थित सभी भवन पूर्णतः राज्य सरकार के स्वामित्व में होते हैं। किसी भी सरकारी कर्मचारी द्वारा सार्वजनिक संपत्ति पर निजी अधिकार जताना सेवा नियमावली का खुला उल्लंघन माना जाता है। 'इंडिया की सोच बुलंद न्यूज़' इस मामले की गंभीरता को रेखांकित करता है कि आखिर एक लोक सेवक किस आधार पर सरकारी कार्यालय को व्यक्तिगत संपत्ति बता रहा है? क्या यह प्रशासनिक शिथिलता का परिणाम है या सत्ता के संरक्षण में पनप रही निरंकुशता?
​जिलाधिकारी की चुप्पी पर खड़े हो रहे प्रश्न
​विवाद के तूल पकड़ने के बाद अब सीधे बांदा जिलाधिकारी (DM) की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लग रहे हैं। स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जब मामला सार्वजनिक हो चुका है, तो अब तक संबंधित लेखपाल के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की गई? 'इंडिया की सोच बुलंद न्यूज़' को स्थानीय नागरिकों ने बताया कि पूर्व में भी राजस्व विभाग में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की शिकायतें होती रही हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई न होने के कारण कर्मचारियों के हौसले बुलंद हैं।
​पारदर्शी जांच और अभिलेखों को सार्वजनिक करने की मांग
​मामला अब केवल एक कर्मचारी के व्यवहार तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह भ्रष्टाचार और सरकारी संपत्तियों के दुरुपयोग की ओर भी इशारा कर रहा है। क्षेत्रीय जनता और राजनीतिक संगठनों ने मांग की है कि:
​लेखपाल रविंद्र यादव के विरुद्ध तत्काल उच्च स्तरीय जांच बैठाई जाए।
​संबंधित भवन के स्वामित्व संबंधी सरकारी अभिलेखों को सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट की जाए।
​दोषी पाए जाने पर सेवा समाप्ति जैसी कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित हो।
​बांदा में घटित यह प्रकरण अब जिला प्रशासन की जवाबदेही और पारदर्शिता के लिए एक अग्निपरीक्षा बन गया है। 'इंडिया की सोच बुलंद न्यूज़' इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है ताकि जनता को न्याय मिल सके और सरकारी तंत्र की शुचिता बनी रहे।
​स्थान: बांदा, उत्तर प्रदेश

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