इंडिया की सोच बुलंद न्यूज़: प्रशासनिक गलियारों से बड़ी खबर

 

विशेष कवरेज: दबंग कार्यशैली और आईपीएस चारु निगम का सफर

ब्यूरो रिपोर्ट: सुल्तानपुर/उत्तर प्रदेश

सुल्तानपुर: उत्तर प्रदेश कैडर की 2014 बैच की आईपीएस अधिकारी चारु निगम एक बार फिर अपनी कार्यशैली को लेकर चर्चा के केंद्र में हैं। अपनी ट्रेनिंग से लेकर अब तक, उन्होंने अपनी ड्यूटी के प्रति जो समर्पण दिखाया है, उसकी मिसाल आज भी विभाग और जनता के बीच दी जाती है।

इंडिया की सोच बुलंद न्यूज़ लेकर आया है उनके कार्यकाल के उन अहम पड़ावों की रिपोर्ट, जिन्होंने उन्हें सुर्खियों में बनाए रखा।

1. गोरखपुर से शुरू हुआ 'निर्भीक' सफर

बतौर एएसपी गोरखपुर में अपनी ट्रेनिंग के दौरान ही चारु निगम ने अपनी मजबूत इच्छाशक्ति का परिचय दिया था। एक शराब की दुकान को बंद कराने के दौरान तत्कालीन राजनीतिक नेतृत्व के साथ हुई उनकी तीखी नोकझोंक की घटना ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं। इस दौरान उनके पेशेवर रुख और नियम-कायदों के प्रति उनकी अडिगता की व्यापक स्तर पर सराहना की गई थी।

2. 36 घंटे में मासूम की बरामदगी: मानवीय चेहरा

राजीव मेडिकल कॉलेज (माझगवा) क्षेत्र से आरती नाम की महिला के मासूम बच्चे के गायब होने के मामले ने पुलिस के सामने बड़ी चुनौती पेश की थी। इंडिया की सोच बुलंद न्यूज़ को मिली जानकारी के अनुसार, एएसपी के रूप में चारु निगम ने इस केस को व्यक्तिगत प्राथमिकता पर लिया और महज 36 घंटों के भीतर बच्चे को सुरक्षित बरामद कर मां की गोद में वापस पहुँचाया। इस सफलता ने पुलिस की छवि को जनता के बीच काफी ऊंचा कर दिया था।

3. औरैया में 'खाकी' पर कार्रवाई: जब दरोगा के घर मिली चांदी

पुलिस अधीक्षक (SP) के रूप में औरैया जिले में उनके कार्यकाल को आज भी याद किया जाता है। एक व्यापारी से हुई लूट के मामले की तह तक जाते हुए, उन्होंने विभाग के भीतर मौजूद काली भेड़ों पर भी प्रहार किया। जांच के दौरान एक दरोगा के सरकारी आवास से 50 किलो चांदी की बरामदगी कर उन्होंने महकमे में सनसनी फैला दी थी। उनकी इस निष्पक्ष कार्रवाई ने संदेश दिया कि कानून सबके लिए बराबर है।

4. विदाई का वह भावुक पल: वृद्धाश्रम में विदाई

साल 2017 में गाजियाबाद ट्रांसफर के समय, सेनानायक (Commandant) पद पर तैनाती के दौरान उनकी विदाई का वीडियो आज भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय है। एक भव्य आयोजन के बजाय, उन्होंने वृद्धाश्रम में बुजुर्गों के बीच अपनी विदाई मनाई। इंडिया की सोच बुलंद न्यूज़ का मानना है कि ऐसे संवेदनशीलता वाले कार्य ही एक अधिकारी को जनता का चहेता बनाते हैं।

निष्कर्ष

आईपीएस चारु निगम का अब तक का सफर यह साबित करता है कि वे न केवल एक सख्त अधिकारी हैं, बल्कि उनके भीतर एक संवेदनशील हृदय भी है। उनकी कार्यशैली भविष्य के पुलिस अधिकारियों के लिए एक नजीर पेश करती है।

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