सत्ता नहीं, सेवा हमारा संकल्प — न डरेंगे, न डराएँगे


जेडीयू नेत्री शालिनी सिंह पटेल

राजनीति मेरे लिए कभी भी केवल पद, प्रतिष्ठा या सत्ता प्राप्त करने का माध्यम नहीं रही है, बल्कि यह मेरे लिए जनसेवा का एक पवित्र दायित्व और सामाजिक उत्तरदायित्व है। मेरा स्पष्ट मानना है कि हमारा काम जनता की आवाज़ बनना है, न कि किसी को डराना, धमकाना या दबाव बनाना। लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि जनता का सेवक होता है, शासक नहीं। जब हम इस मूल भावना को आत्मसात कर लेते हैं, तब राजनीति सेवा का मार्ग बन जाती है, संघर्ष का संकल्प बन जाती है और समाज परिवर्तन का सशक्त माध्यम बन जाती है। आज के समय में अक्सर देखा जाता है कि पद और शक्ति के प्रभाव से भय का वातावरण बनाया जाता है, लेकिन मेरा विश्वास है कि डर और दबाव से न समाज मजबूत होता है और न ही लोकतंत्र। सच्ची राजनीति वही है जिसमें संवेदनशीलता हो, जवाबदेही हो, पारदर्शिता हो और जनहित सर्वोपरि हो। जनता हमें इसलिए चुनती है कि हम उनके अधिकारों की रक्षा करें, उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनें और समाधान के लिए निरंतर प्रयास करें। जनसेवा का वास्तविक अर्थ है हर गरीब, किसान, महिला, युवा, मजदूर और जरूरतमंद के साथ मजबूती से खड़ा रहना। उनका सम्मान, उनकी सुरक्षा, उनका आत्मसम्मान और उनका विकास ही हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि हमारी नीयत साफ है और उद्देश्य जनकल्याण है, तो किसी भी पद, व्यक्ति या परिस्थिति से डरने की आवश्यकता नहीं है। हमारा साहस हमारी सच्चाई से आता है और हमारी ताकत जनता के विश्वास से मिलती है। मैं संकल्प लेती हूँ कि राजनीति में सदैव सेवा, संवाद, ईमानदारी और संघर्ष की राह पर चलूँगी। हम न किसी से डरेंगे, न किसी को डराएँगे — हमारा लक्ष्य केवल जनहित, न्याय और समाज का समग्र विकास रहेगा।

इंडिया की सोच बुलंद से जिला क्राइम रिपोर्टर सर्वेश बाजपेई उर्फ (राजा हिन्दुस्तानी) बांदा 

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