बल्दीराय/सुलतानपुर |
इंडिया की सोच बुलंद न्यूज़ आज जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की एक ऐसी तस्वीर पेश कर रहा है, जो न केवल चौंकाने वाली है बल्कि विभागीय सतर्कता पर गंभीर सवाल भी खड़े करती है। सुल्तानपुर मेडिकल कॉलेज, जिसे जिले की लाइफलाइन माना जाता है, उसके ठीक सामने कथित तौर पर अवैध रूप से संचालित क्लीनिकों और संदिग्ध विशेषज्ञों का जमावड़ा लगा हुआ है।
BAMS का बोर्ड और 'सर्जरी' के दावे: क्या है हकीकत?
स्थानीय सूत्रों और ग्रामीणों के अनुसार, मेडिकल कॉलेज के सामने स्थित कुछ क्लीनिकों पर BAMS (आयुर्वेद) की डिग्री का बोर्ड लगाकर कथित तौर पर एलोपैथिक और गंभीर सर्जरी तक का काम किया जा रहा है। इंडिया की सोच बुलंद न्यूज़ की पड़ताल में यह बात सामने आई है कि कुछ व्यक्ति स्वयं को 'हड्डी रोग विशेषज्ञ' बताकर फ्रैक्चर, प्लास्टर और यहाँ तक कि ऑपरेशन जैसे जोखिम भरे दावे कर रहे हैं।
प्यारेपट्टी रोड पर 'अस्पताल' का साम्राज्य?
आरोप है कि यह नेटवर्क सिर्फ एक क्लीनिक तक सीमित नहीं है, बल्कि प्यारेपट्टी रोड पर भी एक कथित अस्पताल खड़ा कर दिया गया है। स्थानीय लोगों का दावा है कि यहाँ इलाज के नाम पर गरीब मरीजों से मोटी रकम वसूली जा रही है। सवाल यह उठता है कि क्या इन संस्थानों के पास मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय से वैध रजिस्ट्रेशन और विशेषज्ञता से जुड़े आवश्यक दस्तावेज मौजूद हैं?
विभागीय चुप्पी पर उठते गंभीर सवाल
इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर है। इंडिया की सोच बुलंद न्यूज़ पूछता है कि:
आखिर मेडिकल कॉलेज के इतने करीब चल रहे इन संदिग्ध केंद्रों पर अभी तक विभागीय छापा क्यों नहीं पड़ा?
क्या ड्रग इंस्पेक्टर और क्लिनिकल रजिस्ट्रेशन विभाग को इन गतिविधियों की भनक नहीं है?
क्या यह केवल प्रशासनिक लापरवाही है या इसके पीछे कोई गहरा गठजोड़ है?
कानूनी पक्ष और निष्पक्षता:
हमारी टीम ने इस मामले में विभागीय पक्ष जानने की कोशिश की है। नियमतः किसी भी क्लीनिक को चलाने के लिए Clinical Establishment Act के तहत पंजीकरण अनिवार्य है। बिना विशेषज्ञ डिग्री (जैसे MS Ortho) के हड्डी का ऑपरेशन करना न केवल अवैध है, बल्कि मरीज की जान के साथ सीधा खिलवाड़ है।
इंडिया की सोच बुलंद न्यूज़ की मांग
क्षेत्र के नागरिकों और जागरूक समाज ने प्रशासन से मांग की है कि:
मेडिकल कॉलेज के सामने संचालित सभी निजी क्लीनिकों के रजिस्ट्रेशन और डिग्री की तत्काल जांच हो।
प्यारेपट्टी रोड स्थित अस्पताल के लाइसेंस की पारदर्शिता के साथ जांच की जाए।
नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों को तत्काल सील कर उन पर कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।
निष्कर्ष:
अगर बिना डिग्री वाले लोग इसी तरह 'विशेषज्ञ' बनकर इलाज करते रहे, तो गरीब जनता का भरोसा सिस्टम से उठ जाएगा। इंडिया की सोच बुलंद न्यूज़ इस खबर के माध्यम से प्रशासन को आगाह करता है कि किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय, वक्त रहते इन 'मौत के सौदागरों' पर नकेल कसी जाए।
रिपोर्ट: जय प्रकाश सिंह

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