बांदा नरसंहार: 6 साल के मासूम की हत्या के दोषियों को उम्रकैद, कोर्ट ने दो सगे भाइयों समेत तीन को सुनाई कठोर सजा


बांदा। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से न्याय की एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहाँ न्यायालय ने एक मासूम की बेरहमी से हत्या करने वाले अपराधियों को उनके किए की सजा मुकर्रर की है। 'इंडिया की सोच बुलंद न्यूज़' को प्राप्त जानकारी के अनुसार, छह वर्षीय बालक का अपहरण कर उसकी गला दबाकर हत्या करने और साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से शव को कुएं में फेंकने के मामले में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।

न्यायालय का सख्त रुख: आजीवन कारावास और अर्थदंड

अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट श्रीपाल सिंह की अदालत ने शुक्रवार को इस जघन्य अपराध के लिए दो सगे भाइयों सहित तीन अभियुक्तों को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। 'इंडिया की सोच बुलंद न्यूज़' के विधिक सूत्रों के मुताबिक, दोषियों पर 18-18 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया है। न्यायालय ने यह भी आदेशित किया है कि जुर्माने की कुल धनराशि में से आधी राशि पीड़ित बालक की शोकाकुल माता को प्रदान की जाएगी।

क्या था पूरा मामला?

यह हृदयविदारक घटना नवंबर 2020 की है। अपर जिला शासकीय अधिवक्ता जय प्रकाश साहू ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि बांदा की आवास विकास कॉलोनी निवासी ममता रैकवार ने 12 नवंबर 2020 को कोतवाली नगर में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, उनका छह वर्षीय पुत्र करन उर्फ बाबू 11 नवंबर की शाम करीब 6 बजे लापता हो गया था। आरोप था कि काशीराम कॉलोनी निम्नीपार निवासी पप्पू माली पुत्र अशोक माली उसे अपने साथ ले गया था, जिसके बाद बालक का कहीं पता नहीं चला।

पुलिस तफ्तीश और रोंगटे खड़े कर देने वाला खुलासा

प्रारंभ में पुलिस ने अपहरण की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की। विवेचक नंदराम प्रजापति ने जब मुख्य आरोपी पप्पू माली को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की, तो परतें खुलती चली गईं। 'इंडिया की सोच बुलंद न्यूज़' की रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी ने अपने भाई सोनू माली और साथी बाला प्रसाद पुत्र रामकिशोर कुशवाहा के साथ मिलकर इस वारदात को अंजाम देने की बात स्वीकार की।

दोषियों की निशानदेही पर 13 नवंबर 2020 को मासूम करन का शव राकेश सोनी के बगीचे में स्थित एक कुएं से बरामद किया गया। पुलिस ने तत्काल मामले में हत्या (302/34) और साक्ष्य मिटाने (201) की धाराओं की वृद्धि की।

सात गवाहों की गवाही ने पक्का किया अपराध

अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में कुल सात महत्वपूर्ण गवाह पेश किए गए। पत्रावली पर उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्यों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों को आधार मानते हुए न्यायाधीश ने सोनू माली, पप्पू माली और बालाप्रसाद कुशवाहा को दोषी करार दिया। 'इंडिया की सोच बुलंद न्यूज़' समाज को सचेत करता है कि कानून की नजरों से कोई भी अपराधी बच नहीं सकता। अदालत के इस फैसले से पीड़ित परिवार को चार साल बाद न्याय मिला है।

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