केन्द्र सरकार के यूजीसी फैसलों को लेकर
(यूजीसी) की नीतियों के विरोध में राष्ट्रपति को संबोधित एक चार सूत्रीय ज्ञापन उप जिलाधिकारी बल्दीराय को सौपा गया
क्षेत्र के सवर्णो का आरोप है कि यूजीसी की वर्तमान और प्रस्तावित नीतियां देश के उच्च शिक्षा तंत्र, शिक्षकों,शोधार्थियों और विद्यार्थियों के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं। सवर्ण समाज ने ज्ञापन में कहा है कि वे शिक्षा,लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े विषयों पर सदैव सजग रहे हैं। उनका मानना है कि इन नीतियों से शिक्षा की गुणवत्ता, पारदर्शिता और समान अवसर की भावना को गंभीर क्षति पहुंचने की आशंका है। सवर्ण समाज ने जोर दिया कि शिक्षा किसी भी राष्ट्र की रीढ़ होती है और इसमें असंतुलित या जल्दबाजी में लिया गया निर्णय दीर्घकालिक नुकसान पहुंचा सकता है। सवर्ण समाज के जानकार लोगो ने बताया कि यूजीसी के वर्तमान निर्णयों को लेकर देशभर में शिक्षाविदों, छात्रों और सामाजिक संगठनों के बीच गहरी चिंता और असंतोष व्याप्त है विद्यालयों जैसी संस्थाओं को जाति, धर्म या लिंग के आधार पर छात्रों को बांटने से बचना चाहिए। सवर्ण समाज ने जोर दिया कि जब कोई बालक विद्यालय जाता है,तो वह केवल एक छात्र होता है,वहां कोई जाति,धर्म या लिंग नहीं होता। इस विषय पर महान शिक्षाविदों और शोध छात्रों से भी राय लेने की आवश्यकता है सवर्ण समाज ने राष्ट्रपति से प्रमुख बिंदुओं पर विचार करने का आग्रह किया है। इनमें यूजीसी से संबंधित विवादित नीतियों/प्रस्तावों पर पुनर्विचार करना, शिक्षकों,छात्रों एवं विशेषज्ञों से व्यापक परामर्श के बाद ही अंतिम निर्णय लेना, उच्च शिक्षा की स्वायत्तता,गुणवत्ता एवं समानता को प्राथमिकता देना,और शिक्षा व्यवस्था को व्यवसायीकरण से मुक्त रखते हुए जनहित में निर्णय सुनिश्चित करना शामिल है। सवर्ण समाज ने विश्वास व्यक्त किया है कि राष्ट्रपति देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन होने के नाते इस गंभीर विषय पर संज्ञान लेंगे और राष्ट्रहित में उचित दिशा-निर्देश प्रदान करेंगे।
रिपोर्टर
जय प्रकाश सिंह बल्दीराय सुल्तानपुर
इंडिया की सोच बुलंद से

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