पड़ोसी देश कोलंबिया में हालात को लेकर गंभीर चिंता जताई जा रही है. कोलंबियाई सरकार और सुरक्षा विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि इस घटनाक्रम के दूरगामी और अस्थिर करने वाले प्रभाव हो सकते हैं, खासकर सीमा सुरक्षा और शरणार्थी संकट के संदर्भ में. इतना ही नहीं मादुरो की गिरफ्तारी के बाद ट्रंप ने कोलंबियाई राष्ट्रपति को "अपनी जान बचाने" की धमकी भी दी है।
कोलंबिया सरकार ने शनिवार तड़के वेनेजुएला पर किए गए अमेरिकी हमलों की कड़ी निंदा की. इन हमलों में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया और मादुरो को हिरासत में लिया गया. इसके तुरंत बाद कोलंबिया ने वेनेजुएला से लगती अपनी 2,219 किलोमीटर लंबी पूर्वी भूमि सीमा को मजबूत करने का फैसला किया, जो पहले से ही विद्रोही गतिविधियों और कोकीन उत्पादन के लिए संवेदनशील क्षेत्र मानी जाती है।
कोलंबियाई राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो के अनुसार, सरकार ने सुबह करीब 3 बजे एक आपात राष्ट्रीय सुरक्षा बैठक बुलाई. राष्ट्रपति पेट्रो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि कोलंबियाई सरकार वेनेजुएला और पूरे लैटिन अमेरिका की संप्रभुता पर हुए इस हमले की निंदा करती है. उन्होंने यह भी बताया कि सीमा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राज्य बलों को तैनात किया जा रहा है।
अमेरिकी कार्रवाई के बाद कोलंबिया ने अपनी सशस्त्र सेनाओं को सक्रिय कर दिया है. सीमा पार स्थित कुकुता क्षेत्र में सैनिकों और बख्तरबंद वाहनों की तैनाती की गई है. राष्ट्रपति पेट्रो ने चेतावनी दी है कि वेनेजुएला में बढ़ती हिंसा के चलते शरणार्थियों का बड़े पैमाने पर पलायन हो सकता है, जिससे कोलंबिया पर भारी दबाव पड़ेगा।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मादुरो को हटाए जाने से कोलंबिया की पहले से कमजोर सुरक्षा स्थिति और बिगड़ सकती है. सीमा क्षेत्रों में सक्रिय सशस्त्र समूह, तस्करी नेटवर्क और अवैध ड्रग कारोबार इस अस्थिरता का फायदा उठा सकते हैं।
वहीं, शरणार्थी सहायता संगठनों ने भी चेतावनी दी है कि अमेरिकी हस्तक्षेप के बाद यदि वेनेजुएला में हालात बिगड़ते हैं, तो सबसे अधिक असर कोलंबिया पर पड़ेगा. बड़ी संख्या में लोगों के सीमा पार करने की आशंका को देखते हुए मानवीय और सुरक्षा दोनों स्तरों पर चुनौतियां बढ़ सकती हैं...

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