सुलतानपुर। राजकीय मेडिकल कॉलेज एक बार फिर चर्चाओं के केंद्र में है। इस बार मामला एक सेवानिवृत्त वाहन चालक की आनन-फानन में हुई पुनर्नियुक्ति और उसके कार्य आवंटन से जुड़ा है, जो विभागीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। इंडिया की सोच बुलंद न्यूज़ को मिली जानकारी के अनुसार, इस प्रकरण ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन की कार्यशैली को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
मात्र 8 दिन में दोबारा तैनाती: क्या है पूरा मामला?
सूत्रों के मुताबिक, दिसंबर 2025 में सेवानिवृत्त हुए चालक राम यज्ञ को कथित तौर पर सेवा समाप्ति के मात्र आठ दिन के भीतर ही पुनः नियुक्त कर लिया गया। इंडिया की सोच बुलंद न्यूज़ को सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, उक्त चालक की नियुक्ति आधिकारिक तौर पर 'शव वाहन' के संचालन के लिए की गई थी, लेकिन हकीकत में उनसे वीआईपी (VIP) मूवमेंट में एम्बुलेंस चलवाने का कार्य लिया जा रहा है।
मेडिकल कॉलेज के रिकॉर्ड्स का हवाला देते हुए बताया जा रहा है कि 17 जनवरी को इलाहाबाद के मुख्य न्यायमूर्ति और 20 जनवरी को महंत नृत्य गोपाल दास के सुलतानपुर आगमन के दौरान, जारी ड्यूटी लिस्ट में क्रम संख्या 6 पर उक्त चालक का नाम दर्ज था।
वाहन संख्या: यूपी 41-बीजी 4055 (एम्बुलेंस)
ड्यूटी: वीआईपी मूवमेंट में डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ के साथ तैनाती।
इंडिया की सोच बुलंद न्यूज़ इस बात की ओर ध्यानाकर्षण करता है कि जिस चालक को शव वाहन के लिए रखा गया, उसे महत्वपूर्ण वीआईपी प्रोटोकॉल में तैनात करना प्रशासनिक समझ से परे नजर आ रहा है।
डीजल खपत और लॉग बुक में अनियमितता की आशंका?
सूत्रों का यह भी दावा है कि उक्त चालक पर पूर्व में लॉग बुक के साथ छेड़छाड़ करने के गंभीर आरोप लगते रहे हैं। चर्चा है कि कम दूरी तय करने के बावजूद लॉग बुक में अधिक किलोमीटर दर्शाकर सरकारी धन और डीजल के दुरुपयोग की आशंका बनी रहती है। इंडिया की सोच बुलंद न्यूज़ इन आरोपों की पुष्टि नहीं करता है, लेकिन क्षेत्रीय चर्चाओं और शिकायतों के आधार पर यह जांच का विषय है।
प्रशासनिक जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न
कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सलिल श्रीवास्तव के कार्यकाल के दौरान हुई इस नियुक्ति को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर किस विशेष परिस्थिति या नियमों के तहत इस चालक को पुनः तीन माह की संविदा पर रखा गया? क्या अन्य चालकों की उपलब्धता के बावजूद किसी विशेष लाभ के लिए यह निर्णय लिया गया?
पक्ष: इस पूरे प्रकरण पर मेडिकल कॉलेज प्रशासन का आधिकारिक पक्ष अभी आना शेष है। प्रशासन का वक्तव्य आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
रिपोर्ट: राजमनी पाण्डेय, सुलतानपुर
स्त्रोत: इंडिया की सोच बुलंद

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